मुख पृष्ठ » तारे-सितारे » एस्ट्रो वाणी » सात फरवरी से शनि होंगे तुला राशि में वक्री
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करीब 30 वर्ष बाद शनिदेव 7 फरवरी को शाम 7 बजकर 40 मिनट पर कुटिल गति से तुला राशि में 139 दिन के लिए वक्री हो जाएंगे। 13 अप्रैल को जैसे ही सूर्य मेष राशि में आएंगे एवं शनि तुला में होंगे, दोनों ही ग्रह उच्च के होकर एक-दूसरे से सप्तम हो जाने पर शनिदेव अतिवक्री हो जाएंगे।

16 मई से शनि 81 दिन के लिए पुनः कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। इस कारण सिंह राशि को साढ़ेसाती एवं मिथुन, कुंभ को अढ़ैया का प्रभाव रहेगा। शनिदेव अपनी उच्च राशि तुला में वक्री हो जाने के कारण अत्यधिक शक्तिशाली हो जाएंगे। 25 जून 2012 को मार्गी होकर 4 अगस्त को तुला में वापस आएंगे।

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ज्योतिषाचार्य पं. धर्मेन्द्र शास्त्री ने बताया कि तीस वर्ष बाद वर्ष-2011 में शनिदेव अपनी उच्च राशि तुला में 15 नवंबर को आए। अपने पिता सूर्यदेव से नवम या दशम भाव में होने से कुटिल गति व सप्तम, अष्टम होने पर अतिवक्री हो जाते हैं। इस वर्ष शनिदेव वक्री, अतिवक्री होंगे जिसका देश-दुनिया पर प्रभाव संभावित है।

गुरु भी होंगे अतिचारी : ज्योतिषियों ने बताया कि गुरु इस समय यानी 7 फरवरी से मेष में अतिचारी अर्थात् तेज गति से चलने वाले हो जाएंगे। शनिदेव वक्री अर्थात पीछे की तरफ चलने वाले होंगे। इस कारण जनहानि हो सकती है।

क्या होगा असर :
- ज्योतिषियों का मत है कि चार राज्यों के चुनावों में अप्रत्याशित परिणाम आ सकते हैं।
- लोहा, तेल, काली वस्तुओं के कारोबार में गिरावट आ सकती है।
- राजनेताओं में मतभेद उत्पन्न होने के योग भी हैं।
- साथ ही मौसम खराब रहेगा।

राशियों पर प्रभाव :
शनि के वक्री होने पर मेष, धनु को लाभ, तुला, वृषभ, वृश्चिक, मिथुन, कर्क को खर्च की अधिकता, मकर, मीन में स्वास्थ्य परेशानी, सिंह, कुंभ व कन्या राशि वालों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ेगा।
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